
जुबा: दशकों तक चले गृहयुद्ध के बाद सूडान से अलग होकर 2011 में अस्तित्व में आये नए देश दक्षिण सूडान में नेतृत्व को लेकर जारी तनातनी के कारण स्थिति दिन ब दिन बिगडती जा रही है जिससे यहां गृहयुद्ध की आशंका प्रबल हो गई है। तेल के अकूत भंडार दक्षिण सूडान में यह सारा विवाद तब शुरू हुआ जब डिंका समुदाय से संबद्ध राष्ट्रपति सल्वा कीर ने न्यूएर कबीले से संबद्ध पूर्व राष्ट्रपति रीक माशर पर षडयंत्र करके तख्तापलट करने की कोशिश का आरोप लगाया।
इसके बाद दोनों के समर्थकों के आपसी संघर्ष में करीब 600 लोग मारे गए हैं। दोनों दिग्गज नेताओं की आपसी रंजिश ने अब सेना और प्रशासन को भी दो गुटों में बांटना शुरू कर दिया है। दक्षिण सूडान के यूनिटी प्रांत की राजधानी बेनतिउ पर माशर समर्थकों ने कल अपना कब्जा जमा लिया है। बेनतिउ पर कब्जे की यह कार्रवाई सेना के डिवीजनल कमांडर जनरल जान कोंग के नेतृत्व में हुई है। जनरल कोंग ने माशर को अपना समर्थन दिया है जिसके बदले माशर ने जनरल कोंग को यूनिटी का गर्वनर नियुक्त किया है।
दक्षिण सूडान की सरकार ने अपने ट्वीटर खाते के जरिये इस खबर की पुष्टि की है कि बेनतिउ पर अब उसका आधिपत्य नहीं रहा है। बल्कि यह माशर को समर्थन देने की घोषणा करने वाले जनरल कोंग के कब्जे में है। हालांकि सरकार ने यह कहा है कि राज्य के तेल क्षेत्र पर अब भी उनका ही कब्जा है।
